गुरु सियाग सिद्धयोग ध्यान करने की चरण-दर-चरण विधि
नए लोगों के लिए एक सम्पूर्ण अभ्यास मार्गदर्शिका
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| सिद्ध-योग ध्यान कैसे करें |
सिद्धयोग ध्यान कैसे करें? How to practice Siddha Yoga meditation (Step-by-Step Procedure of Guru Siyag Siddha Yoga Meditation)
- शक्तिपात दीक्षा लेना (एक बार)।
- मंत्र जाप (प्रतिक्षण)।
- ध्यान लगाने बैठना (सुबह व शाम 15 -15 मिनट)।
Step 1. शक्तिपात दीक्षा लेना
| संजीवनी मन्त्र का रहस्य |
- यह मंत्र केवल गुरुदेव की आवाज में सुनने के बाद ही कार्य करता है, आप और हमारी आवाज में नहीं।
- मंत्र सरल है एवं याद रखने में आसान है।
- मंत्र को बोलना नहीं है, केवल मन ही मन बिना जीभ व होंठ हिलाए जपना है जैसे पुस्तक पढते समय मन ही मन पढते है।
- मोबाईल पर कॉल करके - कृपया इस नंबर पर कॉल करें, आपको गुरुदेव की आवाज में मन्त्र सुने देगा, एक बार में समझ नहीं आये तो दुबारा कॉल करें 07533006009
- गुरुदेव की वेबसाइट पर - www.the-comforter.org
- इस विडियो को देख कर।

- अन्य सोशियल मीडिया जैसे फेसबुक, यु-ट्यूब, ट्विटर आदि पर गुरु रामलाल सियाग संजीवनी मन्त्र सर्च करके।
Step 2. मंत्र जाप
- प्रतिक्षण उठते-बैठते, खाते-पीते, कार्य करते हुए जब भी मौका मिले इस मंत्र को मन ही मन जपते रहना है।
- उदाहरण के लिए मानों कि मन्त्र है "राधा कृष्ण राधा" (हालाँकि मन्त्र में शब्द दुसरे हैं) तो आपको इस प्रकार जपना है - राधा कृष्ण राधा, राधा कृष्ण राधा, राधा कृष्ण राधा, राधा कृष्ण राधा ...
- शुरु शुरु में बार बार याद करके जपना पड़ेगा, लेकिन कुछ समय बाद अपने आप जपना चालू हो सकता है, ऋषियों ने इसे "अजपा" (नाम रट) कहा है।
Step 3. ध्यान लगाना (गुरु सियाग मंत्र कुण्डलिनी जागरण विधि)
- खुली, समतल व हवादार जगह में जमीन पर आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं।
- गुरुदेव की तस्वीर सामने रखें एवं 1-2 मिनट तक खुली आँखों से एकाग्रता से देखें।
- अपनी समस्या के समाधान हेतु गुरुदेव से करुण प्रार्थना करें।
- अब आँखें बंद करके गुरुदेव के चित्र को अपने आज्ञाचक्र पर (जहाँ बिन्दी या तिलक लगाते हैं या शिव के तीसरे नेत्र की जगह) केन्द्रित करते हुए गुरुदेव से 15 मिनट ध्यान लगाने की अरदास करें (अनुमति मांगें)।
- अब गुरुदेव द्वारा बताए गए दिव्य मंत्र का मन ही मन सघन जाप करें।
- इस दौरान कोई भी शारीरिक, मानसिक, यौगिक क्रिया हो सकती है, कृपया घबराएं नहीं व इन्हें रोकने का प्रयास ना करें तथा शरीर को ढीला छोड़ दें। ध्यान अवधि पूर्ण होने पर ये क्रियाएं स्वत: रूक जाएगी।
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| Guru Ramlal Ji Siyag Image |
गुरु सियाग सिद्ध योग ध्यान का अभ्यास किसे करना चाहिए?
ध्यान रखने योग्य बातें / सावधानियां
- संजीवनी मन्त्र सुनने के बाद पहली बार ध्यान करने बैठने से पहले लगभग एक दिन तक उसे मन ही मन जपते रहिये ताकि आपका पहला ध्यान सफलतापूर्वक लग जाये (ये लेखक के निजी व अनुभव आधारित विचार हैं)।
- ध्यान की अवधि में मंत्र जाप लगातार जारी रखें, आँखें ना खोलें, व बीच में उठें नहीं।
- सामूहिक ध्यान कर रहें हैं तो एक दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाकर बैठें, तथा दूसरों की यौगिक क्रियाओं को सुनकर विचलित नहीं होवें, अपना ध्यान आंखें बंद रखते हुए जारी रखें।
- गुरुदेव की तस्वीर के लिए इस लेख में दी गई तस्वीर का स्क्रीनशॉट ले सकते हैं, वेबसाइट से ले सकते हैं, या घर पर फोटो मंगवा सकते हैं।
- कृपया मंत्र मुँह से बोलकर किसी को ना बताएं, अगर किसी के समझ में नहीं आ रहा है तो उसे लिख कर बताएं।
- किसी भी दिशा में मुँह करके बैठ सकते हैं, कोई धूप अगरबत्ती करने की जरुरत / बाध्यता नहीं है।
- चटाई, गद्दा आदि आवश्यकतानुसार बिछा सकते हैं।
- ताबीज, या किसी देवी देवता की मूर्ति पहनी हो तो ध्यान के समय उतार दें।
- जमीन पर नहीं बैठ सकते हैं तो कुर्सी, सोफा, चारपाई या पलंग पर बैठ सकते हैं, बैठने की स्थिति में नहीं हैं तो खड़े खड़े या सोते हुए भी ध्यान कर सकते हैं।
- ध्यान हेतु केवल 15 मिनट का समय ही मांगना है।
- अधिकांश लोगों में 15 मिनट बाद स्वतः आँखें खुल जाती हैं, अगर शुरू शुरू में ऐसा न हो तो अलार्म लगा सकते हैं।
- यौगिक क्रियाओं का होना साधक की शारीरिक, मानसिक स्थिति व विश्वास (faith) पर निर्भर करता है।कुछ दिखना - तेज रोशनी, रंग आदि, सुनना, सुगंध आना, महसूस होना, कंपन, झुकना, लेटना, हँसना, रोना, योगासन होना, प्राणायाम होना, ताली बजाना आदि कुछ भी हो सकता है।
- ये सब अलग अलग व्यक्तियों में अलग अलग होता है, शरीर की आवश्यकतानुसार होता है।
- अगर किसी व्यक्ति के शरीर में कोई क्रिया नहीं होती है तो या तो उसे जरूरत नहीं है या फिर वह अभी नकारात्मक है, ऐसे में विश्वास के साथ लगातार मंत्र जाप व ध्यान में बैठना जारी रखिए, गुरुदेव से प्रार्थना करते रहिए, कुछ दिन या महिनों बाद ध्यान लगना शुरू हो जाएगा।
- सबसे अच्छी बात है कि आनंद की अनुभूति प्रत्येक व्यक्ति को होती है जबकि इससे किसी तरह का कोई नुकसान कभी नहीं होता है, अतः बेफिक्र होकर ध्यान लगाने हेतु बैठें।
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| गुरुदेव सियाग ध्यान योग |
Conclusion
About the Author
Disclaimer
Frequently Asked Questions About Step-By-Step Siddha Yoga Meditation (FAQs)❓
सिद्ध ध्यान क्या है?
गुरु सियाग सिद्धयोग ध्यान को ही सिद्ध ध्यान कहा जाता है।
सिद्धयोग ध्यान कब व कितनी बार करें?
सिद्धयोग ध्यान दिन में दो बार सुबह-शाम खाली पेट 15 मिनट के लिए करें। सुबह शोच क्रिया से निवृत्त होकर तथा शाम को भोजन करने से आधा- एक घंटा पहले।
सिद्धयोग ध्यान करने के लिए कैसे बैठें? किस दिशा में मुंह रखें?
आप किसी भी दिशा में मुंह करके बैठ सकते हैं, जहाँ आपको आरामदायक लगे उस जगह बैठें या विशेष परिस्थितियों में खड़े भी रह सकते हैं या सोते हुए भी ध्यान कर सकते हैं, कोई बाध्यता नहीं है।
सिद्धयोग ध्यान हेतु मन्त्र कैसे प्राप्त करें?
गुरु सियाग सिद्धयोग ध्यान करने के लिए आप फोन करके, गुरुदेव रामलाल जी सियाग के विडियो देख के, गुरुदेव की ऑफिसियल वेबसाइट पे जाके या विभिन्न सोशल मीडिया पे गुरुदेव के चैनल / पोस्ट / पेज पर जाकर संजीवनी मन्त्र प्राप्त कर सकते हैं।
सिद्धयोग में ध्यान कितने दिन में लगता है?
सिद्धयोग में ध्यान लगना व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करता है, यह पहले दिन भी लग सकता है, तथा कुछ दिन या महीने भी लग सकते हैं, बस नियमित रूप से ध्यान-विधि अनुसार श्रद्धा सहित मन्त्र जाप व ध्यान हेतु बैठते रहिये। अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें या कमेंट करें।
सिद्धयोग ध्यान कौन कर सकता है?
सिद्धयोग ध्यान दुनियां के किसी भी देश का, किसी भी जाति-धर्म का, किसी भी उम्र का कोई भी व्यक्ति कर सकता है जिसे मन्त्र याद रह सके। इसके लिए कोई योगी या सन्यासी होना जरुरी नहीं है।






Jai gurudev behut he badeya Yog h har aadmi ko kerna chaheya
ReplyDeleteजय गुरुदेव, आपका बहुत - बहुत धन्यवाद l
Deleteकृपया अपने ग्रुप्स में शेअर अवश्य कीजिये l
जय गुरुदेव,
Deleteकमेन्ट करने के लिए आपका सादर आभार l
कृपया अधिक से अधिक जगहों पर शेयर करें l
जय गुरुदेव l
Me bhi siddhaguru shri gurumayi chidvilasanand ka shishya hu aapne jo kuch bhi kaha hai bilkul sahi hai... Me apna hi example dena chahta hu ki mai bahut hi bhtka hua ladka tha or hum log bahut phle se gurudev se jude hai pr me siddhyog abhyas karta nahi tha par jb se krne lga hu mujhme adbhut parivrtan hue hai or apne guru ke prati or sabhi ke prati prem bhav huaa hai aur vastvik satya ko janne ki lalak badh rahi din pratidin aur antarik shanti ki anubhuti hui hai.. siddhayog mahayog hai. Sadgurunath maharaj ki jay
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