Get Relief from Coughs with Ayurveda: Herbs, Remedies, and Techniques

खांसी का आयुर्वेदिक उपचार - अब कहें पुरानी खांसी को अलविदा

Find natural relief from coughs with Ayurveda. Learn about the different herbs, remedies, and techniques that can help you feel better and breathe easier.


Relief from Coughs with Ayurveda
Relief from Coughs with Ayurveda

खांसी एक आम समस्या है जिससे कई लोग पीड़ित रहते हैं, खासकर ठंड में। 

हालांकि, खांसी, श्वासनली (वायुमार्ग) में से बलगम, बाहरी कणों व जलन पैदा करने वाली चीजों को बाहर निकालने हेतु एक सामान्य व प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, लेकिन कभी-कभी यह काफी असहज और परेशान करने वाली हो सकती है। 
खांसी ठीक करने के लिए एलोपेथिक उपचार में प्रायः खांसी की दवाई और गोलियां दी जाती हैं, लेकिन उनके दुष्प्रभाव हो सकते हैं तथा वे हमेशा प्रभावी हो यह जरुरी नहीं है। जबकि, आयुर्वेदिक दवा खांसी के इलाज के लिए एक प्राकृतिक और समग्र विकल्प है। 
आयुर्वेद, चिकित्सा की एक प्राचीन भारतीय प्रणाली है जिसका उपयोग 5,000 वर्षों से भी अधिक समय से किया जा रहा है। यह शरीर के तीन दोषों या ऊर्जा - वात, पित्त और कफ को संतुलित करने के लिए जड़ी-बूटियों, मसालों और खाद्य पदार्थों सहित प्राकृतिक उपचारों के उपयोग पर जोर देता है।
अगर आप 
  • लम्बे समय से खांसी (persistent coughs) से परेशान हैं
  • बार-बार खांसी होती है
  • जुकाम के साथ या बाद में खांसी होती है
  • खांसी की अंग्रेजी दवा syrup से खांसी ठीक नहीं हो रही है या उसके साइड इफ़ेक्ट हो रहे हैं
  • खांसी का इलाज घरेलू तरीकों (ayurvedic home remedies for coughs) से करना चाहते हैं
  • खाँसी की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवाई (best ayurvedic remedies for coughs) जानना चाहते हैं

तो इस लेख में, आयुर्वेद के अनुसार खांसी के प्राकृतिक उपचार (natural remedies for coughs according to ayurveda) से सम्बन्धित विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे।

INDEX

A. Basic / General Info सामान्य जानकारी 

1. खांसी के कारण 
2. खांसी के प्रकार (TYPES OF COUGH) -
  • तीव्र खांसी (Acute Cough) व पुरानी खांसी (Chronic Cough)
  • सुखी (Dry) व गीली (Wet) खांसी 
  • क्रुप (Croup) खांसी 
  • काली खांसी (Whooping Cough / Pertussis)
3. खांसी की जाँच (Diagnosis of cough)
4. खांसी का उपचार (Anti-tussive Medicines)
5. खांसी का आयुर्वेदिक इलाज (AYURVEDIC TREATMENT OF COUGH)
  • हर्बल उपचार / आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां 
  • स्वस्थ आहार
  • जीवनशैली में बदलाव
  • पंचकर्म चिकित्सा
6. खांसी का हर्बल उपचार / आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां  (Herbal Anti-tussive Medicines) 
  • अदरक
  • तुलसी
  • शहद
  • हल्दी
  • मुलेठी
  • काली मिर्च
  • घी
  • लौंग
  • पिप्पली
  • शंखपुष्पी
  • वसाका

B. Advanced Info विशेष / विशिष्ट जानकारी

  • खाँसी की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवाई
  • खांसी ठीक करने हेतु महत्वपूर्ण टिप्स 

खांसी के कारण (खांसी क्यों होती है?)

यह सामान्य सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी विभिन्न श्वसन समस्याओं का एक लक्षण है।
खांसी के कुछ सामान्य कारण निम्न हो सकते हैं (Common Causes of Cough) -
  • ठंड, फ्लू (Cold, Flu) जैसे Upper Respiratory Tract Infections
  • एलर्जी (अस्थमा, हे फीवर / बुख़ार)
  • पर्यावरणीय उत्तेजक पदार्थों से संपर्क (धूम्रपान, प्रदूषण)
  • अम्ल प्रतिवाह (एसिड रिफ्लक्स) व गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग (GERD)
  • क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)
  • ब्रोंकाइटिस
  • न्यूमोनिया
  • साइनुसाइटिस

खांसी के प्रकार (TYPES OF COUGH) -

खांसी के आयुर्वेदिक उपचार (effective ayurvedic treatment for coughs) से पहले, खांसी के विभिन्न प्रकार  एवं कारणों को समझना जरुरी है। 

अवधि के आधार पर खांसी मुख्यतः दो प्रकार की होती है - तीव्र (Acute) व पुरानी (Chronic)।

तीव्र खांसी (Acute Cough)

तीव्र खांसी एक अचानक होने वाली अस्थायी खांसी है जो प्रायः तीन सप्ताह से कम समय तक रहती है। यह आम तौर पर सर्दी या फ्लू जैसे संक्रमण के कारण होती है, और इसके लक्षण हैं - नाक बहना, बुखार, गले में खराश आदि।

पुरानी खांसी (Chronic Cough)

पुरानी खांसी तीन सप्ताह से अधिक समय तक लगातार रहने वाली खांसी होती है। यह अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी, एसिड रिफ्लक्स, या कुछ दवाओं सहित कई कारकों के कारण हो सकती है। पुरानी खांसी से काफी दुर्बलता व दैनिक जीवन में परेशानी हो सकती है।


खांसी के कुछ अन्य प्रकार इस प्रकार हैं - 


सूखी खांसी / शुष्क खांसी (Dry Cough)

बिना कफ या बलगम वाली खांसी, जो अक्सर वायरल संक्रमण, एलर्जी या जलन के कारण होती है।

गीली खांसी (Wet / Productive Cough)

बलगम या कफ वाली खांसी, जो अक्सर फ्लू या ब्रोंकाइटिस जैसे बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण के कारण होती है।

क्रुप खांसी / कुक्कर खांसी (Croup Cough)

गहरी, भौंकने वाली खांसी (कुत्तों की तरह) जो अक्सर छोटे बच्चों में होती है, जो स्वरयंत्र (Larynx) और श्वासनली (Trachea) की सूजन के कारण होती है।

छाती की खांसी (Chesty Cough)

कफ या बलगम वाली खांसी, जो अक्सर ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसी स्थितियों के कारण होती है।
रात के समय की खांसी: खांसी जो रात के दौरान होती है, जो स्लीप एपनिया, अस्थमा या जीईआरडी के कारण हो सकती है।

काली खांसी (पर्टुसिस) / Whooping Cough 

  • एक अत्यधिक संक्रामक श्वसन बीमारी जो जीवाणु बोर्डेटेला पर्टुसिस के कारण होती है। यह मुख्य रूप से खांसने और छींकने से फैलती है, और सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है, हालांकि यह शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए सबसे खतरनाक है।
  • काली खांसी के लक्षण - बहती नाक, हल्का बुखार, शुरू में हल्की खांसी, बाद में अधिक गंभीर खांसी के दौरे ("हूपिंग" ध्वनि), गंभीर मामलों में खांसी के कारण उल्टी व सांस लेना मुश्किल हो जाता है। 
  • काली खांसी के उपचार हेतु एंटीबायोटिक्स व रोकथाम के लिए टीकाकरण जरूरी होता है, मुख्यतः छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए।

आपकी खांसी किस प्रकार की है, यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रभावी उपचार करने में मदद मिलती है। यदि आपकी खांसी है अन्य लक्षणों सहित लगातार रहती है, तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य करना चाहिए।

खांसी की जाँच (Diagnosis of cough) 

खांसी के प्रकार व कारणों का निदान रोगी के चिकित्सा इतिहास, शारीरिक परीक्षण, छाती का एक्स-रे, व थूक / बलगम की कल्चर जांच आदि के द्वारा किया जाता है।

खांसी का उपचार (Anti-tussive Medicines)

खांसी के एलोपेथिक उपचार में बैक्टीरिया-संक्रमण के इलाज हेतु एंटीबायोटिक्स, लक्षणों को कम करने के लिए डीकॉन्गेस्टेंट, एक्स्पेक्टोरेंट, एंटी-हिस्टामिनिक और दर्द निवारक दवाएं, पुरानी खांसी के इलाज हेतु वायुमार्ग को खोलने व सूजन कम करने के लिए ब्रोन्कोडायलेटर्स और कॉर्टिकोस्टेरॉइड उपयोग किये जाते हैं।

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज (AYURVEDIC TREATMENT OF COUGH)

आयुर्वेद में खांसी के मूल कारण को दूर करने व शरीर में दोषों के संतुलन को बनाये रखने पर जोर दिया जाता है। 

प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली, आयुर्वेद, के अनुसार खांसी कफ और वात दोषों के असंतुलन के कारण होती है, जो क्रमशः फेफड़ों में स्नेहन और वायु की गति के लिए जिम्मेदार होते हैं।

खांसी के लिए सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक उपचारों में से कुछ इस प्रकार हैं: 

खांसी का हर्बल उपचार / आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां  (Herbal Anti-tussive Medicines) 

अदरक, हल्दी, नद्यपान, शंखपुष्पी, तुलसी, वसाका आदि जड़ी-बूटियों में सूजन-रोधी, कफ निस्सारक जैसे गुण होते हैं तथा इनके सेवन से फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार व खांसी के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

स्वस्थ आहार

आयुर्वेद में खांसी के उपचार हेतु फल - सब्जियों, साबुत अनाज व लीन प्रोटीन से भरपूर आहार की सलाह दी जाती है। (पथ्य)

साथ ही मसालेदार, तले हुए खाद्य पदार्थ, फ्रिज के ठंडे व प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये श्वसन प्रणाली को खराब कर सकते हैं। (अपथ्य)

जीवनशैली में बदलाव

नियमित स्व-देखभाल जैसे व्यायाम, योग, प्राणायाम, ध्यान आदि तनाव कम करने वाली तकनीकों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करके श्वसन तंत्र को मजबूत व फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है। 

धूम्रपान छोड़ना, प्रदूषकों व जलन पैदा करने वाले पदार्थों से दूर रहना भी श्वसन तंत्र के लिए महत्वपूर्ण होता है।

पंचकर्म चिकित्सा

पंचकर्म, आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण पहलू, पांच चरणों वाली शुद्धिकरण प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य शरीर से विषाक्त पदार्थों को खत्म करना और दोषों के संतुलन को बहाल करना है। 

खांसी के उपचार हेतु प्रमुख पंचकर्म चिकित्सा में शामिल हैं - वमन व नास्य।
  • वमन या चिकित्सीय उल्टी, जो शरीर से अतिरिक्त कफ को खत्म करने में मदद करती है।
  • नास्य में नासिका छिद्र, नाक मार्ग व फेफड़ों की सफाई तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता (साँस लेने) में सुधार करने हेतु नाक में औषधीय तेल या पाउडर डाला जाता है। 


खांसी का हर्बल उपचार / आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां  (Herbal Anti-tussive Medicines) 

अदरक (Ginger) / सौंठ या शुंथि (सूखा अदरक)

अदरक एक शक्तिशाली जड़ी बूटी है जिसका उपयोग आयुर्वेद में सदियों से खांसी सहित कई तरह की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है। 

यह अपने जीवाणुरोधी (Anti-bacterial), दाह-रोधक (Anti-inflammatory) व एक्सपेक्टोरेंट गुणों के लिए जानी जाती है और माना जाता है कि यह छाती में जमाव, गले को राहत देने और खांसी को कम करने में मदद करती है। 

अदरक का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है, जैसे अदरक की चाय पीना, ताज़ा अदरक को चबाना या अदरक से बनी दवा लेना।

Pros: प्राकृतिक, सुरक्षित, व आसानी से सुलभ। 
Cons: कुछ व्यक्तियों के पेट में जलन (Heartburn) व अपच (Indigestion) की समस्या हो सकती है


तुलसी (Holy Basil)

तुलसी, जिसे पवित्र पौधा माना जाता है, एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो खांसी सहित कई तरह की बीमारियों के इलाज के लिए जानी जाती है। 

तुलसी में भी जीवाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) व एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो संक्रमण से होने वाली खांसी को ठीक करने में प्रभावी होते हैं। 

तुलसी का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है, जैसे तुलसी की चाय पीना, तुलसी की ताज़ी पत्तियों को चबाना या तुलसी से बनी दवा लेना।

Pros: प्राकृतिक, सुरक्षित, व आसानी से सुलभ। 
Cons: गंभीर लक्षणों में प्रायः प्रभावी नहीं होती है।


शहद (Honey)

शहद एक प्राकृतिक कफ सप्रेसेंट व स्वीटनर है जिसका उपयोग अक्सर खांसी के आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है। 

यह अपने जीवाणुरोधी गुण, गले को शीतल करने व खांसी को कम करने के लिए जाना जाता है। 

शहद का गर्म पानी, नींबू के रस या अदरक के साथ मिलाकर या चाय या अन्य पेय पदार्थों में मिलाकर सेवन किया जा सकता है।

Pros: प्राकृतिक, सुरक्षित व सस्ती।
Cons: मधुमक्खी या शहद से एलर्जी वाले या शाकाहारी आहार (Vegan Diet) लेने वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त नहीं है।


हल्दी (Turmeric)

हल्दी एक पीला मसाला है जो जीवाणुनाशक, शक्तिशाली दाह-रोधी, व एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण आयुर्वेदिक दवा के रूप में वृहद् रूप से उपयोग की जाती है। 

यह गले को आराम देने तथा संक्रमण से होने वाली खांसी को कम करने में काफी प्रभावी मानी जाती है। 

हल्दी का सेवन कई तरह से किया जा सकता है, जैसे हल्दी की चाय पीना, इसे खाना पकाने में शामिल करना, या हल्दी से बनी दवा लेना। :   विपक्ष: 

मुलैठी / यष्टिमधु / नद्यपान / Licorice Root

मुलैठी की जड़ मीठी होती है जिसका उपयोग आमतौर पर आयुर्वेद में खांसी सहित कई तरह की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। 

मुलैठी में कफ निस्सारक / कफोत्सारक (expectorant) गुण होते हैं, यानि कि यह वायुमार्ग से बलगम को पतला / ढीला करने व साफ करने, सूजन को कम करने में मदद करती है। 

मुलेठी का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है, जैसे मुलेठी की जड़ की चाय पीना, मुलेठी की जड़ से बनी दवा लेना, या मुलेठी की जड़ की छड़ें चबाना।

Pros: प्राकृतिक, सुरक्षित, व आसानी से सुलभ। 
Cons: कुछ दवाओं (जैसे रक्तचाप या हार्मोन संबंधी दवाएं) से इसकी प्रतिक्रिया हो सकती है।


काली मिर्च (Black Pepper)

काली मिर्च एक मसाला है जो आमतौर पर खांसी के आयुर्वेदिक उपचार के लिए प्रयोग की जाती है। 

काली मिर्च में कफ निस्सारक / कफोत्सारक (expectorant) गुण होते हैं, यानि कि यह वायुमार्ग से बलगम को ढीला करने व साफ करने में मदद करती है।  
काली मिर्च को खाने में मिलाकर या शहद और गर्म पानी में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। 

घी (Ghee)

घी का उपयोग आयुर्वेद में खांसी सहित कई तरह की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। 

घी में लुब्रिकेटिंग गुण होते हैं, यानि कि यह गले को राहत देने व खांसी को कम करने में मदद करता है। 

घी का सेवन खाने में मिलाकर या गर्म दूध में मिलाकर कर सकते हैं। 


लौंग (Cloves)

लौंग एक मसाला है जो खांसी के आयुर्वेदिक उपचार में प्रयोग किया जा सकता है। 

लौंग में कफ निस्सारक व जीवाणुरोधी गुण होते हैं, जो कि वे वायुमार्ग से बलगम को ढीला करने, साफ करने में मदद करते हैं, साथ ही संक्रमण से लड़ने में भी मदद करते हैं। 

लौंग का सेवन खाने में मिलाकर या शहद और गर्म पानी में मिलाकर कर सकते हैं। 

पिप्पली (Pippali or Long Pepper)

पिप्‍पली एक लंबी काली मिर्च है जो अक्सर खांसी के आयुर्वेदिक उपचार में इस्‍तेमाल की जाती है। 

पिप्‍पली में भी कफ निस्सारक गुण होते हैं, जो खांसी और सीने में जमाव को दूर करने में मदद कर सकते हैं।

पिप्‍पली का सेवन कई तरह से कर सकते हैं, जैसे पिप्‍पली की चाय पीना, पिप्‍पली के सप्लीमेंट्स लेना या पिप्‍पली को चबाना।

Pros: प्राकृतिक, सुरक्षित, व आसानी से सुलभ। 
Cons: रक्त को पतला करने वाली कुछ दवाओं के साथ प्रतिक्रिया हो सकती है।


शंखपुष्पी (Shankhpushpi)

शंखपुष्पी जड़ी-बूटी का उपयोग आमतौर पर खांसी और सांस की समस्याओं के इलाज के लिए प्रयुक्त होने वाली आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है। 

शंखपुष्पी में कफ निस्सारक गुण होते हैं।

वसाका / वासा / अडूसा / अडूलसा Adulsa / मालाबार अखरोट

आयुर्वेदिक जड़ी बूटी वसाका (Vasaka) का उपयोग खांसी सहित श्वसन संबंधी अन्य समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। 

वसाका में जीवाणुरोधी, एक्सपेक्टोरेंट और ब्रोन्कोडायलेटर गुण होते हैं, यानि कि इससे वायुमार्ग से बलगम को ढीला करने व साफ करने में, संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है तथा सांस लेने में सुधार होता है।

Pros: प्राकृतिक और सुरक्षित, आसानी से सुलभ।
Cons: कुछ व्यक्तियों में एलर्जी हो सकती है।


अजवाइन (Carom Seeds)

अजवाईन में कफ निस्सारक व जलनरोधी गुण होते हैं जो खांसी और सीने में जमाव को दूर करने में मदद कर सकते हैं। 

Pros: प्राकृतिक, सुरक्षित, व आसानी से सुलभ। 
Cons: कुछ व्यक्तियों के पेट में जलन (Heartburn) व अपच (Indigestion) की समस्या हो सकती है।

कंटकारी (सोलनम ज़ैंथोकार्पम)

कंटकारी में कफ निस्सारक गुण होते हैं जो खांसी और छाती में जमाव से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।

Pros: प्राकृतिक, सुरक्षित, व आसानी से सुलभ। 
Cons: 
कुछ व्यक्तियों में एलर्जी हो सकती है


NOTE:- 

  1. इन जड़ी बूटियों का चाय, टिंचर, कैप्सूल और पाउडर सहित विभिन्न रूपों में सेवन किया जा सकता है।
  2. इन उपचारों की प्रभाविता व्यक्तिगत कारकों व लक्षणों की गंभीरता के आधार पर भिन्न हो सकती है।
  3. विश्वस्त स्रोतों से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का चयन करें, एवं 
  4. किसी भी नई जड़ी-बूटी या पूरक आहार को शुरू करने से पहले एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

खाँसी की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवाई Best Ayurvedic Medicine for Coughs

उपर वर्णित आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां खांसी से राहत देने में सक्षम हैं लेकिन प्रायः कोई एक नुस्खा इतना ज्यादा प्रभावी नहीं हो पाता है, अतः खांसी के लक्षणों व प्रकार के आधार पर दो या दो से अधिक जड़ी-बुटियों का मिश्रण जरूरी हो जाता है। 

आयुर्वेदिक जड़ी-बुटियों को दवा के रूप में उपयोग करने के लिए उनकी व्यापक जानकारी, दवा तैयार करने के तरीके जैसे काढ़ा, चूर्ण, रस, आसव आदि की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए, साथ ही इन तरीकों से घर पर तैयार की गई आयुर्वेदिक दवा का सेवन करना स्वाद, मात्रा आदि वजहों से अक्सर आसान नहीं होता है। 

इन सब परेशानियों से बचने के लिए बाजार में आयुर्वेदिक जड़ी-बुटियों से बनी बहुत सारी दवाएं उपलब्ध हैं जिनकी निर्देशित मात्रा व विधि के अनुसार सेवन करने से खांसी से छुटकारा पाया जा सकता है। 

यहाँ ऐसी ही 10 सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक दवाओं की जानकारी दी जा रही है। 

खांसी को कहें अलविदा : खांसी में तेजी से राहत के लिए शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक दवाएं (Cough No More: Top 10 Best Ayurvedic Cough Medicine Recommendations for Fast Relief)

1. बैद्यनाथ कसीस भस्म

खांसी और सीने में जमाव को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के मिश्रण से बनी सिरप। 

2. झंडू हनी कफ सिरप 

गले को शांत करने व खांसी से छुटकारा पाने के लिए शहद और अन्य प्राकृतिक अवयवों के संयोजन से बनी सिरप। शहद या मधुमक्खी से एलर्जी वाले या शाकाहारी आहार (Vegan diet) लेने वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त नहीं है।

3. Himalaya Herbals Cough Care

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के मिश्रण से बने इस सिरप का उपयोग खांसी और सीने में जमाव को दूर करने के लिए किया जाता है।

4. पतंजलि दिव्य सितोपलादि चूर्ण

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के मिश्रण से निर्मित, इस पाउडर को शहद या गर्म दूध के साथ मिलाकर खांसी और सीने में जकड़न से राहत मिल सकती है।

5. डाबर लोकांतो

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के मिश्रण से बने इस सिरप का उपयोग खांसी और सीने में जमाव को दूर करने के लिए किया जाता है।

6. बैद्यनाथ व्योषादि वटी

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के मिश्रण से बना यह सिरप खांसी और सीने में जमाव को दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

7. चरक फार्मा एक्सपेक्टोरेंट सिरप

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बना यह सिरप खांसी और सीने में जकड़न से राहत दिलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

8. डाबर तुलसी ड्रॉप्स

तुलसी के अर्क और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बने इस सिरप का उपयोग खांसी और सीने में जकड़न से राहत दिलाने के लिए किया जाता है। 

9. हर्बल हिल्स कफ सिरप

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के मिश्रण से बने इस सिरप का उपयोग खांसी और सीने में जकड़न से राहत दिलाने के लिए किया जाता है।

10. कफनिल कफ रिलीफ फ़ॉर्मूला

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष प्रीमियम प्रमाण पत्र प्राप्त यह कफ रिलीफ फ़ॉर्मूला मुलेठी की वजह से मीठा जरुर होता है लेकिन यह सिरप नहीं है यानि इसमें चाशनी नहीं है अतः डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति भी इसका सेवन कर सकते हैं।

तुलसी, वसाका, कुलंजन, मुलेठी, पिप्पली, बनफ्सा, कंटकारी, शाठी, सतपुड़ा आदि जड़ी-बुटियों से बना यह फ़ॉर्मूला सभी प्रकार की खांसी के लिए सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधि (Best ayurvedic remedy for coughs) है।

इसके सेवन के बाद किसी तरह का कोई नशा (Drowsiness) नहीं होता है।

यह आल इन वन फ़ॉर्मूला है, यानि, इसके साथ एंटीबायोटिक्स, डीकॉन्गेस्टेंट, एक्स्पेक्टोरेंट, एंटी-हिस्टामिनिक, दर्द निवारक दवाएं, ब्रोन्कोडायलेटर्स, कॉर्टिकोस्टेरॉइड आदि के सेवन की आवश्यकता प्रायः नहीं होती है (लेकिन टाइफाइड, टी.बी. जैसी बिमारियों की वजह से हुई खांसी में एंटीबायोटिक्स लेनी जरुरी हो सकती है)। 

इसका सेवन करना एकदम आसान होता है, सुरक्षित व प्रभावी होने के साथ ही इससे खांसी का उपचार सस्ता भी होता है।



खांसी ठीक करने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स 

1. खांसी की दवा लेने के बाद कम्बल या रजाई से मुंह ढक कर सोयें, दवा का असर शीघ्र होगा।
2. जुकाम या खांसी होने पर अपने नाक या श्वास-मार्ग से बलगम या द्रव्य को उपर की तरफ खींचने के बजाय जोर लगा कर बाहर की तरफ धकेलना चाहिए।



निष्कर्ष

खांसी काफी तकलीफदेह हो सकती है, लेकिन सही आयुर्वेदिक उपचार से, खांसी का इलाज किया जा सकता है व अच्छा महसूस किया जा सकता है। 

अदरक, तुलसी, शहद, हल्दी, नद्यपान जड़, काली मिर्च, घी, लौंग, पिप्पली, शंखपुष्पी, या वसाका का उपयोग करने से पहले व्यक्तिगत दोष प्रकार के लिए उपयुक्त उपचार का चयन करना सुनिश्चित करें। 

यदि आप स्वयं सुनिश्चित नहीं हैं कि कौन से उपाय आपके लिए सही हैं, तो व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें। 

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि आयुर्वेदिक उपचार खांसी के इलाज में अत्यधिक प्रभावी हो सकते हैं, लेकिन उन्हें पारंपरिक चिकित्सा उपचार के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। 

यदि खांसी लम्बी अवधि तक रहे, या इसके साथ में किसी अन्य लक्षण का अनुभव हो रहा हो तो योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें ताकि यह सुनिश्चित हो कि कोई अधिक गंभीर समस्या तो नहीं है। 

इसके अतिरिक्त, यह समझना महत्वपूर्ण है कि आयुर्वेद स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए एक समग्र दृष्टिकोण है, तथा सर्वोत्तम परिणाम दिनचर्या के विभिन्न नियमों के पालन से प्राप्त किए जा सकते हैं, जैसे  स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन तकनीक और आत्म-देखभाल के अन्य उपाय। 

कुल मिलाकर, आयुर्वेदिक उपचार खांसी का इलाज करने, समग्र स्वास्थ्य और आरोग्य देने के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। चाहे कोई एक उपाय या उपायों के संयोजन का उपयोग किया जाये। 

सही दृष्टिकोण और थोड़े से धैर्य के साथ, आप बेहतर महसूस कर सकते हैं और स्वस्थ, जीवंत जीवन का आनंद उठा सकते हैं।


 Disclaimer

  1. कोई भी आयुर्वेदिक उपचार लेने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें। 
  2. इन उपचारों की प्रभाविता व्यक्तिगत कारकों और लक्षणों की गंभीरता के आधार पर भिन्न हो सकती है।

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